रेस्टोरेंट के QR मेन्यू ने ईमेल माँगा? गुमनाम ईमेल है आपका सीक्रेट वेपन!
यार, आजकल ये रेस्टोरेंट वाले भी न, क्या-क्या करते हैं! पिछली बार मैं अपने दोस्तों के साथ एक नए कैफे में गया था। सब बढ़िया चल रहा था, माहौल अच्छा था, और फिर आया मेन्यू। मेन्यू? नहीं, QR कोड! मैंने अपना फोन निकाला, स्कैन किया, और क्या देखता हूँ? "कृपया मेन्यू देखने के लिए अपना ईमेल एड्रेस दर्ज करें।"
भाई साहब, क्या मज़ाक है ये? सिर्फ़ खाना देखने के लिए मुझे अपना जीमेल, याहू, या आउटलुक का परमानेंट एड्रेस देना पड़ेगा? मुझे तो बस ये देखना था कि दाल मखनी कितने की है और बटर चिकन में क्या-क्या है! तुरंत मेरा दिमाग़ घूम गया। ये तो वही बात हो गई कि दुकान में घुसने के लिए आपको अपना आधार कार्ड दिखाना पड़े।
आप जानते हैं, ये छोटी-छोटी बातें कितनी परेशान करती हैं? खासकर तब, जब हमें सिर्फ़ एक झटके का काम हो। मान लीजिए, आपको OLX India पर कोई चीज़ देखनी है, या किसी वेबसाइट पर एक बार के लिए साइन-अप करना है, और वो आपका ईमेल एड्रेस मांगते हैं। क्या आप वाकई अपना पर्सनल, हमेशा इस्तेमाल होने वाला ईमेल एड्रेस देना चाहेंगे, जो स्पैम से भरा पड़ा है?
क्यों हमें अपना असली ईमेल एड्रेस हर जगह नहीं देना चाहिए?
ईमानदारी से कहूं तो, मुझे ये बिल्कुल पसंद नहीं जब कोई वेबसाइट या सर्विस सिर्फ़ बेसिक जानकारी के लिए मेरा ईमेल एड्रेस मांगती है। ये सब डेटा कलेक्ट करने का तरीका है। एक बार जो आपका ईमेल एड्रेस उनके पास चला गया, तो समझ लो, वो आपको प्रमोशनल ईमेल, न्यूज़लेटर, और न जाने क्या-क्या भेजना शुरू कर देंगे। और फिर शुरू होता है अनसब्सक्राइब करने का झंझट, जो कभी खत्म ही नहीं होता।
और ये तो सिर्फ़ स्पैम की बात है। सोचिए, अगर वो डेटा किसी थर्ड-पार्टी को बेच दिया जाए? हमारी प्राइवेसी का क्या? आजकल तो लोग अपनी ऑनलाइन पहचान को लेकर बहुत सजग हो गए हैं। हम सब चाहते हैं कि हमारी ऑनलाइन एक्टिविटी थोड़ी गुमनाम रहे, कम से कम वहाँ जहाँ इसकी ज़रूरत नहीं है।
तो फिर करें क्या? यहीं काम आते हैं अस्थायी ईमेल!
जब मैंने पहली बार अस्थायी ईमेल (temporary email) के बारे में सुना, तो मुझे लगा ये क्या मज़ाक है। लेकिन फिर मैंने इसे इस्तेमाल करना शुरू किया और मेरा नज़रिया बदल गया। ये बिलकुल वैसा ही है जैसे आप किसी दुकान से कुछ खरीदने जाते हैं और आपको कैशियर को अपना असली नाम और पता बताने की ज़रूरत नहीं होती।
जीमेल अस्थायी ईमेल या गूगल अस्थायी मेल जैसे शब्द सुनकर शायद आपको लगे कि गूगल खुद ऐसी सर्विस देता है, लेकिन ऐसा नहीं है। असल में, ये वो सेवाएं हैं जो आपको एक ऐसा ईमेल एड्रेस देती हैं जो कुछ समय के लिए ही मान्य होता है। ये एक नया, अस्थायी इनबॉक्स होता है जो कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों या दिनों तक एक्टिव रहता है।
मेरा अपना अनुभव: QR मेन्यू वाला किस्सा
तो, उस कैफे में जब मैंने देखा कि ईमेल मांग रहे हैं, तो मैंने अपने फोन में एक अस्थायी ईमेल ऐप खोला। कुछ ही सेकंड में मुझे एक नया, अनोखा ईमेल एड्रेस मिल गया। मैंने वो एड्रेस डाला, QR मेन्यू खुल गया, मैंने आराम से खाना ऑर्डर किया, और जैसे ही मैं वहां से निकला, मैंने उस अस्थायी ईमेल को डिलीट कर दिया। मेरे जीमेल में कोई फालतू का ईमेल नहीं आया, मेरी प्राइवेसी भी सुरक्षित रही। एकदम मक्खन की तरह!
अस्थायी ईमेल के फायदे क्या हैं?
- प्राइवेसी की सुरक्षा: सबसे बड़ा फायदा तो यही है। आप अपना असली ईमेल एड्रेस स्पैमर्स और डेटा कलेक्टर्स से बचा सकते हैं।
- स्पैम से बचाव: आपको अनचाहे ईमेल की लिस्ट में शामिल होने का डर नहीं रहता।
- वन-टाइम रजिस्ट्रेशन: कई वेबसाइट्स पर सिर्फ़ एक बार के लिए साइन-अप करना होता है। ऐसे में अस्थायी ईमेल एकदम सही है।
- गुमनाम रहना: अगर आप ऑनलाइन कुछ ऐसा कर रहे हैं जहाँ आप अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं, तो यह एक अच्छा विकल्प है।
कैसे इस्तेमाल करें?
ये बहुत ही आसान है। आपको बस एक अच्छी अस्थायी ईमेल सर्विस ढूंढनी है। कई अच्छी वेबसाइट्स हैं जो ये सुविधा मुफ्त में देती हैं। आप Google पर "temporary email" या "अस्थायी ईमेल" सर्च करके इन्हें ढूंढ सकते हैं। आपको एक ऐसा ईमेल एड्रेस मिलेगा, आप उसे कॉपी करके वेबसाइट पर पेस्ट करेंगे, वेरिफिकेशन लिंक या कोड उसी अस्थायी इनबॉक्स में आ जाएगा, और आपका काम हो जाएगा। जब ज़रूरत खत्म, तो इनबॉक्स को डिलीट कर दें।
तो अगली बार जब कोई रेस्टोरेंट का QR मेन्यू आपसे आपका ईमेल मांगे, या OLX India पर कुछ खरीदने या बेचने के लिए आपको अपना पर्सनल ईमेल देना पड़े, तो घबराइए नहीं। आपके पास एक सीक्रेट वेपन है - गुमनाम ईमेल या अस्थायी ईमेल!
ईमानदारी से, ये छोटी-छोटी चीजें हमारी ऑनलाइन लाइफ को कितना आसान और सुरक्षित बना सकती हैं, ये मैंने खुद महसूस किया है। तो, अगली बार ऐसे किसी जाल में फंसने से पहले, एक अस्थायी ईमेल का इस्तेमाल ज़रूर करें। ये आपकी प्राइवेसी के लिए एक छोटा सा, लेकिन बहुत ज़रूरी कदम है।